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भसियागढ़

भारत वैसे तो पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से संपन्न है और भारत का एक राज्य मध्यप्रदेश अपने वन क्षेत्र के कारण अपने अंदर अद्भुत अतुलनीय प्राकृतिक शोभा समेटे हुए है।  मध्यप्रदेश के  दक्षिण पूर्वी भाग में एक जिला बालाघाट है यह अपनी वन संपदा के कारण प्रदेश में खास स्थान रखता है ।बालाघाट से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक तहसील है ,नाम है कटंगी। इस तहसील के अधिकांश लोग अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। कटंगी से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक गांव है बिसापुर । पहाड़ों की तराई में बसा ये गांव वन संपदा और जल संपदा दोनों से परिपूर्ण हैं। इसी गांव में दो पहाड़ों के बीच एक शिव मंदिर है। गांव को पार करते हुए जब हम मंदिर की तरफ बढ़ते हैं तब गांव के अंतिम छोर में रहने वाले लोग और उनके घरों से परिचित होते हैं। भारत की खास बात है कि इसके हर कोनों में अलग अलग तरीके से बनने वाले घर होते हैं। यहां घर  की छत खपरैल की है, परंतु यहां के लोग अपने जीवन में खुश हैं। रास्ते में जाते समय आपको बच्चे टायर के साथ खेलते हुए दिख सकते हैं। आगे बढ़ने पर मंदिर के रास्ते पर चलते हुए सड़क किनारे हम उन पेड़ों से भी परिचित ह...

कोरोना की उधेड़बुन

आज लॉकडाउन का 34वाँ दिन है। भारतीय जनता का लॉकडाउन में सहयोग अब तक काबिल-ए-तारिफ रहा है। ये आजाद भारत के इतिहास की पहली ऐसी त्रासदी है जिसने लोगों को घरों में बंद रहने को मजबूर कर दिया। ये आवश्यक भी है और वक्त की जरूरत भी परंतु यहाँ इस बात पर भी ध्यान देना अत्यंत आवश्यक हो गया है कि क्या हमारे समाज के सबसे नीचे के तबके को उसके और उसके परिवार का पेट भरने के लिए जो आवश्यक सहायता उस तक पहुंचनी थी  क्या वह उस तक पहुंच रही है? इस सवाल के जवाब में अलग-अलग तर्क दिए जा सकते हैं। हमें मालूम है इस मुश्किल की घड़ी में केंद्र तथा राज्य सरकार यथासंभव हर प्रयास कर रही हैं कि जरूरतमंदों को उनका हक मिले  परंतु फिर भी जिन लोगों को इन मूलभूत सुविधाओं का आवंटन करने का दायित्व सौंपा गया है वह अपने दायित्व का सही  तरह से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। यहां इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है  कि मैं यहां पर सामाजिक संस्थाओं की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि उन लोगों की बात कर रहा हूं जिनको सरकार ने इस काम के लिए चुना है।सरकारी उचित मूल्य की दुकान का भ्रष्टाचार किस से छिपा है, यहां अपना और अपने संबंध...